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Hymn No. 1262 | Date: 21-Aug-1999
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पिलाता जा, पिलाता जा प्यार का जाम, जब तक हो न जाए हमारा काम तमाम ।
पिलाता जा, पिलाता जा प्यार का जाम, जब तक हो न जाए हमारा काम तमाम ।
सनम हमने भी खा रखी है कसम, पीते जाएँगे चाहे हो जाए बेदम ।
मलाल तो इस बात का है, स्वाद चखा देर से क्यों तुमने ।
अगर लायक ना थे, तो लायक क्यूं ना बनाया पहले से हमको ।
पैमाने का सिलसिला, जो शुरु, किया है तुमने टूटने ना देना कभी ।
नशा ज्यों-ज्यों गहराता जाएगा, दूर हो जाएगी हर कमी हमारी ।
जारी रहेगी नई-नई शरारतें, नहीं होगी दोहरानी प्यार की कहानी ।
लोगों में चर्चा आम होगी, कही मैं बावरा तो नहीं ।
मुझे कबूल है सब कुछ, तेरे प्यार के नशे में चूर हो जाने के लिए ।
ले चल मुझे यहाँ से उठा कर कही दूर, जहाँ तू हो और तेरा प्यार और
कोई नहीं ।


- डॉ.संतोष सिंह