VIEW HYMN

Hymn No. 1263 | Date: 22-Aug-1999
Text Size
मतलब नहीं है, मतलब नहीं है, प्रभु किसी बात का कोई मतलब नहीं है ।
मतलब नहीं है, मतलब नहीं है, प्रभु किसी बात का कोई मतलब नहीं है ।
अच्छे-बुरे का कोई मतलब नहीं है, निर्लिप्त का भाव ही वस्तुपदक है ।
करे या ना करे, अगर जो जुडे है तुझसे, तो सुखःदुःख में भी है मस्त हम ।
मन ही मूल है, कर्मो के खेल में, मैं का मूल है, भाव का ही महत्व है सबसे ।
रब सच पूछो तो है अगर केंद्र श्रद्धा का है तू, तो इससे बड़ा ना कोई है मंत्र ।
जन्मता है यहाँ से परम विश्वास, होती है ढलने की शुरूआत रब में ।
महत्व सबका है संसार में, चाहे हो कैसा भी कचरे का ढेर ।
बन जाता है क्या से क्या कोई, जब सदगुरु की पड़ जाती है निगाह ।
फिर ना रहता है किसीका कोई हो चाहे कितना भी महत्वपूर्ण संसार में ।
छुपा रहता है सच्चे प्यार में ज्ञान, या फिर कह ले सच्चे ज्ञान में प्यार ।


- डॉ.संतोष सिंह