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Hymn No. 1265 | Date: 23-Aug-1999
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दिल की बात है, दिल में क्यों रहने दूं ।
दिल की बात है, दिल में क्यों रहने दूं ।
आ गया है दिल में, तो कह लेने दे तू ।
प्यार का मारा हूँ, जब प्यार हो सामने मेरे ।
विश्वास कराने वास्ते, रख दूँ दिल को चीर के सामने उसके ।
जब देखूँगा छवि अपनी, तब जाकर करेगा विश्वास ।
ये तो ना है कुछ, जब जान लेगा तू सोचा हुआ मेरा ।
हर रोम-रोम पर लहू से लिख दूँगा, प्रिय नाम तेरा ।
कहर कितना भी ढा ले तू कहने से बाज आनेवाला नहीं ।
जब ठान लिया, तो कितना भी कर ना छोड़ने वाला नहीं ।
सलामत रहना ना चाहता हूँ अब प्यार में तेरे ।
ये तो ना है कुछ सोचा हुआ मेरा, जब जान लेगा तू ।


- डॉ.संतोष सिंह