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Hymn No. 1269 | Date: 01-Sep-1999
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दिल मिलते ही तुझसे, खिल उठता है कमल के समान ।
दिल मिलते ही तुझसे, खिल उठता है कमल के समान ।
निगाहों से निगाह मिलते ही, होश नहीं रहता हमको अपना ।
रोम-रोम आनंद से तिर उठता है, पाकर करीब तुझको अपने ।
मोहब्बत में जो कुछ न जाना था, वह होने लगा साथ अपने ।
अच्छा-बुरा कुछ ना है लगता, जो खोए रहते है तेरी मोहब्बत में ।
नापाक तन-मन भी पाक हो जाता है, तेरे दामन से लिपटके ।
अच्छा-बुरा कुछ ना है लगता, जो खोए रहते है तेरी मोहब्बत में ।
नापाक तन-मन भी पाक हो जाता है, तेरे दामन से लिपटके ।
मोहब्बत के जोश में भूलके, तेरा सलामती की दुआ कर बैठते है खुदा ।
अदा कर नहीं सकता मोहब्बत का कर्ज, तुझसे जुदा होने के भय से ।
प्यादा था मैं तेरा, मोहब्बत पाकर एक बन गए हम।
नादानीयत समझ या बड़-बोलापन, मगर हमको है मोहब्बत तुझसे ।


- डॉ.संतोष सिंह