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Hymn No. 1270 | Date: 02-Sep-1999
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नामुमकीन को मुमकीन बनानेवाले छलिया, अधिकार है तुझे प्यार में नाच नचाने का ।
नामुमकीन को मुमकीन बनानेवाले छलिया, अधिकार है तुझे प्यार में नाच नचाने का ।
हमारे मनोभावों के अनुरूप स्वांग रचाकर, अपने पास बुलाने का ।
रह सकता है तू हमारे बिन, रह सकते नहीं हम तेरे बिना ।
आने-जाने का कर दे खेल खत्म तू, रख ले पास अपने मनचाहा रूप देकर ।
तेरे बगैर रहना पल भर को हो जाता है मुश्किल, खुशामदी समझा था प्यार कर दे पुरी तू ।
कुछ ना रहा जीवन में जरूरी, सबसे बडी जरूरत हो गया है तू ।
किस्मत लुटी-लुटी सी लग रही है, अपनाकर तू उसे सवार दे।
मान तू या न मान, मन लगता नहीं अब किसी में ।
ऐसा ना हो तेरा बुलावा आने से पहले, छोड़ के चल दूँ संसार मैं ।
माना की तेरा कहना माना नहीं हर बार, पर दिल तो लगाया तुझसे ।


- डॉ.संतोष सिंह