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Hymn No. 1272 | Date: 04-Sep-1999
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प्यार के हम भिखारी है, प्यार पाने आए है दर पर तेरे ।
प्यार के हम भिखारी है, प्यार पाने आए है दर पर तेरे ।
प्यार देकर प्यार लेंगे, प्यार से जो मिलेगा, सब है स्वीकार ।
सुना है तू प्यार का महासागर है, टपका दे प्यार की एक बूंद ।
जन्मो-जन्म का ये प्यासा, तर जाएगा पाकर प्यार तेरा ।
किस्मत में ना लिखा है, तो करवा दे कुछ कर्म ऐसा, मिल जाए प्यार तेरा ।
नियती को बदलना है, हाथो में तेरे भाग्य का चक्र रखकर ।
किसी कुचक्र में फँसने ना फँसने के डर से, निकलके प्यार करे तुझे ।
प्यार में इतना खोए रहे, प्यार के सिवाय कुछ बोध ना हो हमे ।
शाश्वत प्यार से उपजा है संसार, माया तो है आनी-जानी ।
शुभ-अशुभ कुछ ना होता है, प्यार के मूल में प्यार होता है ।


- डॉ.संतोष सिंह