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Hymn No. 1273 | Date: 05-Sep-1999
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सौंपने को सौंपता हूँ अपने सारे ख्वाब को तुझको ।
सौंपने को सौंपता हूँ अपने सारे ख्वाब को तुझको ।
तू माने या न माने, छोड़ दिया अपनेआप को तेरे सहारे ।
सौंपना है तेरे हाथों में, इस माटी के टूटे-फूटे घडे को ।
अंत हो जाए चाहे मेरा, बस जाए बस तू मेरे मन में ।
मेरे दिल का इकलौता तू है राजा, आता क्यों नहीं करीब मेरे ।
ऐसी कौन-सी है मजबूरी, जो बन गई बीच की हमारी दूरी ।
जरूरी कुछ ना रह गया अब, तेरे प्यार के सिवाय ।
लब पर न आने देंगे कोई बात, चाहे उभरे आँखों में पानी बनकर ।
होगा तू बलवान बहुत, पर तेरे हाथ में ना होगा साथ छुडाना ।
खायी है कसम प्यार की, जाएगा तू जहाँ पहुचेगे वहाँ प्यार बनकर ।


- डॉ.संतोष सिंह