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Hymn No. 1274 | Date: 05-Sep-1999
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है.. दिल की गलियों में मच गई है खलबली, तेरे प्यार को लेकर ।
है.. दिल की गलियों में मच गई है खलबली, तेरे प्यार को लेकर ।
सोचता है बहुत, सूझता ना है कुछ, आड़े आ जाता है जो मन मेरा ।
कुछ भी कर जाने की है तमन्ना, तेरा बन जाने के वास्ते ।
सीधी तरह से कर दे तू हा, नहीं तो लग जाऊँगा जो तेरे पीछे ।
साथीया दागदार है मेरा दामन कितना भी, पर दगाबाज नहीं ।
सौदा किया हूँ कई बार अपनेआप का, पर तेरे प्यार का नहीं ।
जो भी आए मन में तेरे तू कर लेना संग मेरे, पर रूकसत ना कर तू पास से तेरे ।
हूँ मैं पिल्ला न जाने कैसा, पर तेरे प्यार वास्ते हूँ वफादार बहुत ।
आज हुआ हूँ फेल तो क्या से, लिखूँगा प्यार की नयी कहानियाँ ।
खल भी मैं, नायक भी मैं, मिटा दूँगा तेरे वास्ते खुद को मैं।


- डॉ.संतोष सिंह