VIEW HYMN

Hymn No. 1283 | Date: 10-Sep-1999
Text Size
काका कुछ और बताओ, जीवन का कोई नया राग सुनाऊँ ।
काका कुछ और बताओ, जीवन का कोई नया राग सुनाऊँ ।
प्यासा हूँ न जाने कब से, मिलने के लिए भटकता रहा तुझसे ।
छोड़कर आया हूँ सबकुछ, पास तेरे आकर हो जाना चाहूँ तेरा ।
शिकवा ना है दिल में, फिर भी शिकायत करना चाहूँ तेरी तुझसे ।
मत बहाना बना, हमारा हर कहाँ हुआ मानने के लिए ।
दिल की हर चाहत मिट रही है, पर तेरे वास्ते बनी हुई है ।
हमारे सवालों का जवाब मत दिया कर, हमारे सवालों के हवाले से ।
सरोकार तू ना रखता होगा किसीसे, पर हम तो रखते है तुझसे ।
हमारी मोहब्बत का अंदाजा, खुद ना है हमको, तो कैसे बताऊँ तुझे ।
पर अब जो बात ना है इसमें, तेरे सिवाय किसी और की जरूरत ना है हमें ।


- डॉ.संतोष सिंह