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Hymn No. 1286 | Date: 13-Sep-1999
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है ऐ.. चल पडे है जो संग तेरे, मिट गई मंजिल की तलाश ।
है ऐ.. चल पडे है जो संग तेरे, मिट गई मंजिल की तलाश ।
आधी-अधुरी यात्री पुरी हो गई, जो साथ मिल गया तेरा ।
दिल जो डरता था प्यार करने से, प्यार उसको हो गया ।
बेपरवाह हो गया मन मेरा लोगो से, जो प्यार की मस्ती छा गई ।
डर-डरके जीने का खौफ निकल गया, जो तेरा हाथ हाथों में आ गया ।
काफूर हो गई मेरे मन की चिंता, जो जल गई तेरे प्यार की आग में ।
समझ ना चाहिए अब दुनियादारी की, दिल में जो फूटा तेरे प्यार का अंकुर ।
दीवानों का हमने नाम सुना था, दीवानों से बदतर हाल हो गया है मेरा ।
मत पूछना तुम कुछ प्यार में, हर सवालों का कुछ और जवाब पाएगा ।
दिमाग में अब कुछ ना है ठहरता, जो दिल में तू छाया है रहता ।


- डॉ.संतोष सिंह