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Hymn No. 1287 | Date: 13-Sep-1999
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हे.. रामजी, हे.. रामजी चाली पड्यो हूँ तारा दर नी ओर ।
हे.. रामजी, हे.. रामजी चाली पड्यो हूँ तारा दर नी ओर ।
राखजो तू मारा प्यारनी लाज, पुरी करजो मारी वात हें.. रामजी हें ...
कालनी आज हूँ वात ना करुँ, मने पहूँचवानू छे आज ना आजे है .....
क्यारथी राह जोऊँ छुं तारा मंजिलनी ओर चालवा माटे है रामजी ....
वच्चे आवे छे इच्छाओं अने कामनाओं ना उन्डो खड्डो अनेक हें राम ....
मारा घबरामन मटी जशे तो तू थामी लेजे प्यार थी मारो हाथ हें राम ...
अधुरी रहेली यात्रा पूरी थई जशे जो तू तारा प्यारमां मेडवावी लेशे हे राम ...
गमनो डर नथी नाही ऐश्वर्य नी चाहत, हूँ तो निकळ्यो छुं तारा प्यार पामवा माटे हें राम ...
खोट होशे मारामां अनेक पण मारा भावो मां ना छे एक हें राम ....
हें... रामजी, हें ... रामजी राखजे तू मारा भावोनी लाज मेडवावी लेजे तू मने आज ...


- डॉ.संतोष सिंह