Hymn No. 1288 | Date: 15-Sep-1999
पिलाता जा, पिलाता जा, प्यार का जाम हमको, हो जाए चाहे बेदम हम ।
पिलाता जा, पिलाता जा, प्यार का जाम हमको, हो जाए चाहे बेदम हम । सनम लिया लाख जनम तो क्या फायदा, अगर घूँट न भर पाये तेरे प्यार का । तरसता रहा हूँ न जाने कब से, चखने को, ना कहना, चूर हो जाने दे अब । परवाह ना है अब किसीकी, प्यार की महफिल में प्यार बनकर ढल जाने दे अब। गम हो या खुशी प्यार का दौर चलता रहे, प्यार का जाम पीने के लिए बहाने की जरूरत ना रही अब । रोम-रोम आतुर है प्यार भरा प्याला पीने के वास्ते, जी में नहीं आता कोई और सवाल । अंत चाहता हूँ ना संत बनकर, मंजनू की भाँति सबह-शाम, प्यार की मस्ती में रहना चाहे । फर्क ना है मुझे चाहे जान अलग हो जाए तन से, पर प्यार से अलग होने ना देना जान मेरी । शान बन चुका है प्यार करना, अगर दुश्मन भी आएगा, तो प्यार बन जाएगा । रहे लाख दूरी तेरे-मेरे बीच में, दिल में होगा जो प्यार का नशा, दूरियाँ बदल जाएगी नजदीकीयों में ।
- डॉ.संतोष सिंह
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