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Hymn No. 1289 | Date: 15-Sep-1999
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खो जाने दे हम को बनकर तुझमें प्यार का शबाब ।
खो जाने दे हम को बनकर तुझमें प्यार का शबाब ।
दूर रहना नहीं चाहता हूँ, रहना पड़े चाहे किसी भी रूप में ।
स्वरूप को लेकर क्या करना, जो भेद कर जाए मुझमें-तुझमें ।
दर्पण के आगे मुझे ना जाना है, अब जो तेरी मूरत देख ना पाऊँ ।
हो जाने दे अँधारी आँखों के आगे, मन में देखा करेंगे दिल की ज्योत से ।
गाहे-बगाहे हर क्षण मुलाकात करेगे, इंतझारी की कमी ना होगी ।
बन जाने दे किरन प्यार की, जा बसेगे तेरे दिल में ।
छलकेंगे आनंद बनकर नजरों से तेरे, झूमा करेंगे रोम-रोम के संग ।
मगन रहूँगा मैं तुझमें, प्यार की मौजे बनकर ।
वजूद मेरा जो मिट जाएगा तुझमें, मौजूद रहूँगा प्यार बनकर ।


- डॉ.संतोष सिंह