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Hymn No. 1293 | Date: 18-Sep-1999
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ढम-ढमा ढम-ढम, छेडा राग नभ में बादलों ने ।
ढम-ढमा ढम-ढम, छेडा राग नभ में बादलों ने ।
चम-चमा चम-चम, नाच उठी बिजुरिया नभ में ।
सन-सना सन-सन, तरंग उठी मस्ती की पवन में ।
छम छमा छमछम, बरस उठी बरखा प्रभु के दिल से ।
गुन गुना गुनगुन गुनगुना, उठे भौरें मस्ती भरे शमा में ।
छप छपा छपछप, बच्चों में होड़ मची भीगने की ।
कल कला कलकल, सुखी हुई सरिता दौड़ पडी पिया से मिलने को ।
हल हला हलहल, इंतजारी हो गई खत्म प्यासी धरा की ।
जल जला जलजल, पुलाकित हो उठा मन देखके नवसृजन को ।
लल लला लल लल, गा उठा दिल याद करके प्रीतम को ।
- डॉ.संतोष सिंह
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ताल के बिन सुना है सारा संसार, जहाँ जाऊँ वहाँ सुनता हूँ तेरी ताल ।
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