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Hymn No. 1294 | Date: 18-Sep-1999
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डफली की ढम-ढम, मेरे मन की रून-झून ।
डफली की ढम-ढम, मेरे मन की रून-झून ।
गा उठा दिल मेरा गीत नया, पाकर प्यार तेरा ।
थिरक उठे कदम मेरे, जो दिया साथ तुमने ।
स्तब्ध रह गई शमा, तेरे गीतों की गूँज से ।
निस्तब्धता को तोड़ा, पवनो की, झनझन झंकार ने ।
मचल उठे मस्ती में, कण-कण करते शोर ।
खामोश महफिल में, बाँध दिया समाँ तेरे प्यार ने ।
यार तुमने बिखेर दिया इंद्रधनुषी घटा एक ही वार में ।
करता है ये कमाल, कितने कालों के बाद तू ।
अब मत तरसाना, सदा तेरा प्यार हम सब पर बरसाना ।
धरा पर प्रेमावतार लेकर सदा तू आना ।
हम प्यासे है के दिलों पर प्यार तू बरसाना ।


- डॉ.संतोष सिंह