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My Divine Blessing
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Hymn No. 127 | Date: 02-Mar-1998
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तेरे सिवाय कौन है मेरा इस जग में,
तेरे सिवाय कौन है मेरा इस जग में,
किससे फरियाद करूं मैं अपने दुखों की ।
माना की उपजे हुये है मेरे थोर कर्मों से ;
आया हूँ तेरे शरण में कब तक सहना पड़ेगा ।
क्या मेरी प्रार्थना कमजोर है इतनी जो तूझ तक ना पहुंचे ।
पर तू तो हर पल मौजुद है इस घूट – घट में ।
तुझसे निराश ना हुआँ हूँ हैरान हूँ मैं ;
मैंने तुझको तो जान नहीं पर सुना हूँ तू विशाल है ।
मत तोड़ मेरे मन की इस धारणा को;
दर – दर के भटकें हुये को शरण मिलता है तेरे दर पे ।
- डॉ.संतोष सिंह
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मेरे आगे तू है, मेरे पीछे तू है, मेरे दाये तू है, मेरे बायें तू है ।
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