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Hymn No. 128 | Date: 04-Mar-1998
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मेरे आगे तू है, मेरे पीछे तू है, मेरे दाये तू है, मेरे बायें तू है ।
मेरे आगे तू है, मेरे पीछे तू है, मेरे दाये तू है, मेरे बायें तू है ।
मेरे ऊपर तू है, मेरे नीचे तू है, हर पल तू है कण – कण में तू है ।
खुली आँखों के सामने तू है, बंद आँखों के पीछे तू ही है ।
मेरा रोम – रोम हुआ है तुझमें, मेरी हर धडकन में तू है ।
तेरे बिन मैं हू अधुरा, फिर तू क्यों मुझसे दूर है इतना ।
नजर क्यों नहीं आता अभी कितनी देर है; तेरे द्वार खडे है राह देखतें ।
मेरा माता तू है, मेरा पिता तू है, मेरा गुरू तू है, मेरा बंधू तू है।
मेरा सखा तू है, तुझसे ही हर नाता है, जो कुछ जानू मैं वो भी तू है ।
जो कुछ नहीं जांनु वो भी तू है, इस जगत में सर्वस्व तू है ।
जो कुछ भी नही है वो तू है तुझसे अलग कुछ भी नहीं इस जगत में ।


- डॉ.संतोष सिंह