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Hymn No. 129 | Date: 04-Mar-1998
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झुम उठा मन मोरा आज मुलाकात हो गयी तुझसे,
झुम उठा मन मोरा आज मुलाकात हो गयी तुझसे,
ऐसा लगा एक बार, होगी पूरी दिल की हर एक आस ।
बेचैन नैनों को चैन आ जाय, जो देख लें तूझे एक बार;
अब मेरे धर का हर एक रास्ता जाता है तेरे दर पे अब ।
खुद को लुटाने को हूँ तैयार मैं, तेरी सलामती के लिये,
साया भी छोडता है साथ किसी भी पल, मैं रहना चाहूँ साथ तेरे हर पल ।
जमाने भर की गुलामी करनी पड़े, तेरे लिये तो हूँ तैयार में;
सब कुछ सह सकता हूँ मैं लिये पर तेरी रूसवाई नहीं ।
सबसे किया हूँ, अब तक बेवफाई, तुझसे है बस मेरी वफा,
मैं तो तेरा अदना सा खिदमतगार तू ही मेरा रहेगा।


- डॉ.संतोष सिंह