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Hymn No. 130 | Date: 05-Mar-1998
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काशी में तूम विश्वनाथ हो, मथुरा में गोपाल ;
काशी में तूम विश्वनाथ हो, मथुरा में गोपाल ;
अयोध्या के तूम राम हो, पूरी के जगन्नाथ हो;
जग के परमब्रह्म परमात्मा हो, मेरे तुम काका हो ।
जहाँ में जहाँ भी जाऊँ तुझे ही पाऊँ मेरे पूर्ण परमात्मा ।
ये उतना ही सच है जितना की तू ना होके है इस धरा पे ।
तेरे सिवाय कोई ना है मेरा, तेरा ही तो सहारा है ।
दूर रहूँ या पास तेरे, रहता है तू हमारे साथ हर पल ।
जल – थल हो या नभ, इस संसार का व्यक्त अव्यक्त रूप ।
अभिव्यक्त करता है, अपने आपको तेरी कृपा से ।
ऐ मेरे दयालु तुझपे मेरा ही नहीं अधिकार है सारे संसार का ।


- डॉ.संतोष सिंह