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Hymn No. 131 | Date: 02-Mar-1998
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आना – जान, मरना – जीना जिंदगी का यह फसाना पुराना है,
आना – जान, मरना – जीना जिंदगी का यह फसाना पुराना है,
कोई नहीं अंजान है इससे, सदियों पुराना यह तराना है ।
कोई भी जात – पात हो, या छोटा – बड़ा सबके लिये यह एक है।
देश की सीमाओं से परे जो आया है उसको एक दिन मिटना है।
आज नहीं तो कल हम सबको खुशी से या दुख से यह धर्म निभाना है ।
कोई बहाना ना चलना है यहाँ, जो एक का हाल होगा वहीं संसार का होना है ।
राजा हो या महाराजा, साधु हो या दुस्कर्मी हाल तो सबका एक ही होना है ।
किसी ने धर्म से निभाया, किसी ने अधर्म से, फल तो सबको पाना है ।
राजी हो या दुःख से, जाना तो सबको है आना अपने अपने कर्मों से है।


- डॉ.संतोष सिंह