VIEW HYMN

Hymn No. 132 | Date: 09-Mar-1998
Text Size
तेरे नयन है कमल समान उनसे बरसे सदा प्रेम की धारा ;
तेरे नयन है कमल समान उनसे बरसे सदा प्रेम की धारा ;
हम जैसे क्षुद्र तर जाते है तेरे सम्मुख बैठ के कुछ पल ।
जीवन के हर पल में तेरे चेहरे पे रहती है सदा मुस्कान ;
हम मतवाले हो के तेरे द्वारे चले आते है तेरा दीदार करने को ।
मुरझाया हुआ मोरा मन खिल उठे फूल के समान ;
तेरी याद आने पे दिल में हलचल सी मच जाती है।
जीवन में प्यार क्या होत है जाना तेरे करीब आने पे;
गैरों को अपना बना के सब कुछ लुटाना सीखा तुझसे हमने ।
जब – जब तुझे याद किया हमने तेरा हाथ माथे पे पाया,
तेरा नाम ले लेके हर दुःख दर्द को मिटाना सीखा हमने ।
निर्मल निर्मित सब से परे परम् आनंद का सागर है तू ;
लाख गलतियों की थीं हम सबने, फिर भी तूने अपनाया ।


- डॉ.संतोष सिंह