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Hymn No. 1296 | Date: 20-Sep-1999
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जारी है जंग अपने आप से लड़ने की, तेरे कदमों में चढ़ने की ।
जारी है जंग अपने आप से लड़ने की, तेरे कदमों में चढ़ने की ।
तस्सबूर ना है दिल को, जब तक तेरे होकर ना रह जाए हम ।
कसम है बेमानी, पहुँचेंगे हम अपनी मंजिल पर प्यार के जोर से ।
शोर होगा किसी और का, चुपचाप चलेंगे हम तेरे दर की ओर ।
बस पिलाते जाना तू प्यार का घूँट हमको, मस्ती में गुजरेगा राह का हर दौर ।
भाग्य के बदौलत ना बैठेंगे हम, पुरूषार्थ करते जाएँगे तेरा नाम ले-लेकर ।
अपनी चूक पर ना देगे प्यार का वास्ता, करेगे कबूल तेरी सजा प्यार समझके ।
प्यार की महफिल में नाम की चाहत ना है हमको, गुमनाम रहकर तेरा नाम स्मरण करेंगे ।
हर शख्स ने चाहा है तुझको, देना पडेगा आयाम हर शख्स की चाहत को ।
फरियाद समझ इसे या प्यार भरी ललकार, कीमत चुकाएँगे ले-लेकर तुझसे ही ।


- डॉ.संतोष सिंह