VIEW HYMN

Hymn No. 1297 | Date: 20-Sep-1999
Text Size
हें.. प्रभु ! भर दे तू मेरी खाली झोली ।
हें.. प्रभु ! भर दे तू मेरी खाली झोली ।
भक्ति हो भावों से भरी, अभाव हो दुर्गुणों का ।
प्रेम से भरा रहे हृदय, नजरों से पिलाता रहूँ तुझे ।
विषम पल में चित्त मेरा समरूप रहे तेरे ।
ज्ञान का क्या कहना, जो मस्त रहूँ चरणों में तेरे ।
बाह्य दोषो का क्या कहना, अंतरमन रमता रहे तुझमें ।
जुदाई का भय ना रहे, भुलाकर एकरूप हो जाऊं तुझमें ।
आलम रहे मस्ती का, प्यार का दौर ना हो खत्म ।
वरण किसी और का ना करें, हर ले तू हमको ।
अर्पित किया सब कुछ तो क्या, तेरा तुझको दिया ।


- डॉ.संतोष सिंह