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Hymn No. 1302 | Date: 25-Sep-1999
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छेड रहा है दिल मेरा नये-नये सरगम, तुझको रिझाने के वास्ते ।
छेड रहा है दिल मेरा नये-नये सरगम, तुझको रिझाने के वास्ते ।
हर पल मन में कोई ना कोई बात है कौंधती, तेरा साथ पाने के वास्ते ।
तन की सीमा से परे कुछ करने को हूँ बेचैन, तेरा प्यार पाने के वास्ते ।
जो चखा पैमाना तेरी नजरों का, हिम्मत गई है बढ़, तेरे आगोश में डूबने के वास्ते।
बदला नहीं सकता कोई अब मुझे, जो हर लिया तुमने प्यार भरे गीतों को सुनाके ।
अब ना बची कोई और रजा, जो दिल ने पहन ली तेरे प्यार की हथकड़ी ।
घड़ी दो घड़ी की बात ना रही, अब हम हो गए तेरे, मैं का साथ छोड़कर ।
हर सितम हो गया है हँसी, जब से फँस गए तेरे प्यार की महफिल में ।
सुहाता नहीं कुछ जो भाने लगा तेरे प्यार की मस्ती में, तेरा रूप में आते है नजर ।
लगाई हुई है तेरे प्यार की आग, अब हमको खाक हो जाने दे, तेरे प्यार के वास्ते ।


- डॉ.संतोष सिंह