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Hymn No. 1304 | Date: 25-Sep-1999
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छेड़ रहा है दिल मेरा इक और राग, तुझे अपना बनाने के लिए ।
छेड़ रहा है दिल मेरा इक और राग, तुझे अपना बनाने के लिए ।
नींद में ख्वाबों का दौर शुरु हो गया, तेरे दिल में जगह पाने के लिए ।
रह-रहकर इक अजीब-सी कंपन होने लगी, तेरे प्यार भरे गीतों को गाने के लिए
भाग्य की जरूरत अब ना रह गई, जो सद्गुरु तेरी छत्र-छाया में आ गया ।
कहना-करना जो होता था मुश्किल, वह बन गया शांत जो पड गई निगाह तेरी
हम है वही काफी कुछ बदल गया, जो फँस गए प्यार भरे फसानो में तेरे ।
ऐसा ना है खत्म हुआ दौर गमों का, पर अब आनंद आने लगा गम में भी ।
पहले नशा करना पड़ता था, अब हर दौर में चूर होते है, प्यार के नशे में ।
छोड़ता है कोई तो ना होता है मन में रंज, जो मन संग होता है तू ।
दंग रह जाता हूँ जब खयाल अपना आता है, सोचता हूँ बेहोश तब थे कि अब है हम ।


- डॉ.संतोष सिंह