VIEW HYMN

Hymn No. 1305 | Date: 26-Sep-1999
Text Size
मत पूछो हमसे, कुछ न आता है हमको प्यार के सिवाय ।
मत पूछो हमसे, कुछ न आता है हमको प्यार के सिवाय ।
आँखों के रहते हुए है अंधे, जो तेरे सिवाय कुछ ना है देख पाती ।
सुन नहीं पाता अब कुछ तेरे गीतो के सिवाय, हुआ है सब मुश्किल ।
किसी और का छुना भाता नहीं, जो तुमने छू दिया तन-मन को मेरे ।
कुछ कहने के काबील नहीं रहे, कंठ मेरे गा उठते है, किसी भी पल गीत तेरे ।
महक अब कोई और नहीं आती, पहचान लेता हूँ उन हवाओं को छूकर तुझे है आती ।
अजीब-सा ना है अब कुछ लगता, जो तू दिल में रहता है सजीव-सा ।
भान रहते हुए भी बेभान होता जा रहा हूँ, तेरे लब का छुआ हुआ जाम पीकर ।
हिम्मत ना है अब किसी में, जो कर दे मुझको अलग तुझसे, जो एक जान बन गए हम ।
मुझ जैसे कितने मिटते रहेंगे कदमों में तेरे, पा नहीं सकते तुझको तेरे आशीष के सिवाय ।


- डॉ.संतोष सिंह