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Hymn No. 1306 | Date: 26-Sep-1999
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क्यों तरसाता है हमको तू इतना, पिला दे मस्ती भरा जाम तेरा ।
क्यों तरसाता है हमको तू इतना, पिला दे मस्ती भरा जाम तेरा ।
छलकाता है तू दिखा-दिखाकर नजरों से, ललचा उठता है मन मेरा ।
तरस खाकर ना पिलाना तू हमें, चाहे तरसते हुए दम तोड़ दे हम ।
हकदार बनकर पीना ना चाहते है मस्ती के जाम को, कर्जदार बनने के लिए ।
हम तो पीना चाहते है प्यार भरी महफिल में यार बनाकर तुझको ।
बदल जाएगी तेरी रजा, जो हो जाएगा तू चूर मस्ती में हमारे संग ।
मगन होंगे हम इतने तेरे प्यार की मस्ती में, बेखबर रहे जग में हम है कि हममें जग ।
ये सवाल भी हो जाएगा खत्म, जब प्यार के सागर में मस्ती की मौजें उठा करेंगी ।
बेताब हो उठा है दिल मेरा, सुनकर ये गीत तेरा, बता दे काका कब होगा हाल ये मेरा ।


- डॉ.संतोष सिंह