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Hymn No. 1307 | Date: 27-Sep-1999
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दम भरता हूँ प्यार का, तेरा साथ पाने के वास्ते ।
दम भरता हूँ प्यार का, तेरा साथ पाने के वास्ते ।
जीवन के हर पलो में नाम लेता हूँ, तेरे पास आने के वास्ते ।
सुनाता हूँ तुझे गीत, तेरे दिल में हलचल मचाने के वास्ते ।
बंद हो चुकी है मेरी सारी करगुजरीयाँ, तेरी महफिल में रहने के वास्ते ।
अच्छा नहीं लगता कुछ भी, रहता है दिल सदा तेरे फेरे में ।
होश-हवाश खो चुका हूँ, प्रियतम तेरे यादों के घेरे में ।
मत पूछ तू मेरा हाल, दर-दर भटकता हूँ बावरों की तरह ।
तेरे प्रेम गीतों को गाते-गुनगुनाते, बन चुका हूँ जग हँसाई का पात्र मैं ।
नौबत आ गई है पत्थर खाने की, मंजूर है तेरा प्यार पाने के वास्ते ।
बचा-कुचा रह न जाए कुछ बाकी, छा जाए मुझ पर और भी तेरे प्यार का जुनून


- डॉ.संतोष सिंह