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Hymn No. 1308 | Date: 29-Sep-1999
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काँव-काँव करके पहूँचा काका हमारे पास, कब से सोया है, उठ जा तू आज ।
काँव-काँव करके पहूँचा काका हमारे पास, कब से सोया है, उठ जा तू आज ।
अँधियारे जीवन में प्रेम प्रकाश लेकर आया हूँ, हो जा तरबतर तू इसमें आज ।
यह मौका मिलता नहीं हर रोज, न जाने कितने काल के बाद आता है पास ।
जो आज ना चखा प्रेम का स्वाद, पछताएगा जन्मो-जनम तक याद करके तू इसे ।
भाग्य से भी ना मिलता है, मौका हाथ आया है तेरे, गुरु की कृपा से ।
मौका रहते उठाना पड़ेगा कदम पुरुषार्थ का, सहजता-सरलता से गोता खाएगा प्रेम सागर में ।
प्रेम रंग जो चढ़ेगा इक बार को तुझपर, हो जाएगा मगन प्रेम में मेरे ।
फिर कुछ नहीं भाएगा जो तू दिन-रात मस्ती भरा प्रेम गीत गाएगा ।
जीते जी बन जाएगी तू प्रेम मूरत, हर दिल तुझको अपना बनाएगा ।
जाना नहीं पड़ेगा माँ के पास तुझको, प्रेम देखकर माँ बस जाएगी पास तेरे ।


- डॉ.संतोष सिंह