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Hymn No. 1309 | Date: 30-Sep-1999
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उमड़ पड़ते है दिल में अनेकों-अनेक भाव देखते ही तुझको ।
उमड़ पड़ते है दिल में अनेकों-अनेक भाव देखते ही तुझको ।
बरस पड़ती है आँखे, जो तेरी बातें मेरे मन को है छु लेती ।
रोम-रोम थरथरा उठता है, जब तेरे गीत गूँजते है फिजा में ।
होशों-हवाश उड़ जाता है, जब बाँध देता हैं महफिल में समाँ तू ।
जीवित-अजीवित हो उठता है बेचैन तुझसे मिलने के वास्ते ।
सालती है दिल को हर वह पल, जब तुझसे अलग होने का पल है आता।
झूठी पड़ जाती है सारी मान्यताएँ, जब तू नया कोई खेल है दिखाता ।
रूप बदल-बदलकर भरमाया कई बार, पर दिलवालों ने पहचाना हर बार ।
आरझुओ के तराजू पर ना है तौलना तुझे, तू भले लेते रहना इम्तिहान ।
सौदा करने ना निकला हूँ, हम तो हो गए है खाक पहली नजर में ।


- डॉ.संतोष सिंह