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Hymn No. 1310 | Date: 30-Sep-1999
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सुनाता हूँ हर रोज हाल दिल का, तुझे फँसाने के वास्ते ।
सुनाता हूँ हर रोज हाल दिल का, तुझे फँसाने के वास्ते ।
किसी न किसी बहाने रहना चाहता हूँ करीब तेरे, प्यार के वास्ते ।
जल-बुन रहा हूँ यार, तूझे अपना बनाने के लिए ।
कर रहा हूँ तैयारी माया से लडने कि, कि मिल जाए तू मुझे ।
जाँबाझी की कर देना चाहता हूँ खडी दिवाल तेरे चारों ओर ।
शोर दुनिया का न पहुँच पाएगा, पहुँच जाऊँगा पास तेरे, दिल के जोर से ।
रोकना है तुझे पैरों में, श्रद्धा की हथकड़ियाँ पहनाकर कि तू चला न जाए दूर ।
बढ़ाते जाऊँगा अपने विश्वास को, तेरे पास जाना है जरूर ।
कैसे भी करके तेरे वास्ते प्रियतम, करना पड़ा तो करुँगा आमरण अनशन ।
दूँगा तुझे सौगात प्यार की यार दिल के लिफाफे में लपेरटकर कि तू बन जाए मेरा ।


- डॉ.संतोष सिंह