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Hymn No. 1311 | Date: 02-Oct-1999
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प्रभु जीवन का हर पल गुजरे तेरे संग, है ये दिल की रजा ।
प्रभु जीवन का हर पल गुजरे तेरे संग, है ये दिल की रजा ।
मिले चाहे तन-मन को कोई सजा, पर तू रहना बस हमारी यादों में ।
हमको दरकार नहीं किसीसे, इस दिल को सरोकार है बस तुझसे ।
जीवन की हर विषम परिस्थितियों में, तू रखना हमारे चित्त को स्थिर सदा ।
कोई कुछ भी कहे, मन ना डोले तुझपर से, पल भर के वास्ते ।
रास्ते हो कितने भी दुर्गम, मन में समता छायी रहे हर पल ।
विषयों के दलदल में रहकर, अलिप्त रहूँ कमल पुष्प के समान ।
मोह ना हो जीवन के किसी एक राग का, वीतराग बन खोया रहूँ तुझमें ।
ज्ञानी बनने की कोई चाहत ना है हमको, पगलाना चाहूँ तेरे प्यार में ।
भजते हुए भजन का कोई भाव ना हो, मस्त होकर रमता हूँ तेरे प्यार में ।


- डॉ.संतोष सिंह