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Hymn No. 1316 | Date: 06-Oct-1999
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तुम नहीं जा सकते छोड़कर हमको, ललकार है हमारी ये तुमको ।
तुम नहीं जा सकते छोड़कर हमको, ललकार है हमारी ये तुमको ।
तुम क्या जानो कितना प्यार है, ना पड़ता है फर्क तुमको, सब कुछ छोडकर पास हमारे मिलावट होगी में मुझमें, पर मेरा प्यार रहे सच्चा जो का है तुझसे ।
तू ना- ना कह सकता है, हमने बाँध लिया जो निगाहों से तुझे ।
जितना बेबस हूँ आज उतना बेबस बनाऊँगा तुझे अपने प्यार के सहारे ।
जानता हूँ, जानता हूँ, जानता है तू सब कुछ, जानता है तू मेरे प्रेम को जिसकी हुई है शिकस्त ।
मन्नत ना है कोई पूरी करवानी, हमारी चाहत है ऐसी जैसे तू लिखे गीतों को ।
जन्नत की तलाश ना है हमें, हम तो सह लेंगे जिल्लत भी, जो मिले तेरे हाथों से ।
मर्ज कोई क्या होगा मुझे, जो हो गया यार का मर्ज मर्जी से तेरे ।
अर्ज अब कुछ ना है करना, जो कहाँ वह करके दिखाने का आया है मौका ।


- डॉ.संतोष सिंह