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Hymn No. 1317 | Date: 07-Oct-1999
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हक तो नहीं, फिर भी हकदार हूँ तेरे प्यार का ।
हक तो नहीं, फिर भी हकदार हूँ तेरे प्यार का ।
करमों से नहीं, फिर भी जन्म से जुडा है नाता तुझसे ।
दिल्लगी करता नहीं मैं तुझसे, ये शरारत है प्यार भरी ।
फरियाद किसी बात की ना हूँ करता, हा यादों से जुडा हूँ तुझसे ।
जन्नत की चाह ना हूँ रखता, मन्नत है तेरे चरणों में बसने की ।
हँसते है लोग देखकर मुझको, हम हँस लेते है ख्यालो में तेरे ।
सवालों का दे ले कितना भी तू जवाब, कुछ याद ना रहा सिवाय तेरे ।
वहम को तोड़ा है तुमने कितनी बार, पर अहम है हमको तेरे ऊपर ।
रहम ना चाहती हूँ तुझसे, कहर ढाना प्यार का तू हमपर ।
बेपरवाह हो चला हूँ तेरी प्यार भरी परवाह के खातिर ।
- डॉ.संतोष सिंह
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