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Hymn No. 1319 | Date: 08-Oct-1999
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मन में उठी तरंग मस्ती की, शरारत सुझी दिल को प्यार भरी ।
मन में उठी तरंग मस्ती की, शरारत सुझी दिल को प्यार भरी ।
धड़क उठा सोच के दिल मेरा, प्रभु तू क्या पास है इस समय ।
चीत्कार करते हुए क्यों पूछ बैठा दिल, अपने आप से, क्यों होता है ऐसा ।
एहसास होते हुए मन को, नजर क्यों नहीं देख पाती तुझको ।
ऐसी कौन-सी कमी है मुझ में, जो मिलने से रोक देती है तुझको ।
तू ही तो है कहता, किसी का मतलब कुछ नहीं, तो क्यों है वह कारण बनता ।
क्या प्यार मेरा अब भी है इक तरफा, जो धड़का नहीं पाता तेरे दिल को ।
खटकती है मेरे मन मैं इक बात सदा, कब बन जाऊँगा मैं तेरा ।
मुझमें जो भी है कमी, प्यार से अपने मिटा दे आज तू उसे ।
बौखलाहट छिपाए ना छुपती है , तेरा कहा हुआ भी कर नहीं पाता हूँ ।


- डॉ.संतोष सिंह