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Hymn No. 1321 | Date: 11-Oct-1999
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साँसों का आसरा ना चाहिए अब मुझे, जो मिल जाए तेरा सहारा ।
साँसों का आसरा ना चाहिए अब मुझे, जो मिल जाए तेरा सहारा ।
मन को अब कुछ रूचता नहीं, तेरे सिवाय कैसे लगे किसी और में दिल ।
दुःख से भरे जीवन में मुस्कराते उठता हूँ, तेरे संग गुजारे गए पलों को याद करके
हर हालात में यादें बनी रहती है दिल के भीतर, जब से प्यार पाया तुझसे ।
दुश्वारियाँ भी बदल गई खुशनूमा पलों में, जैसे-जैसे करीबी बनता गया तेरा ।
यूँ ही सब कुछ अच्छा लगने लगा, जब से नजर लड़ गई है तुझसे ।
इस जटीलता से भरे जीवन का अर्थ, कुछ समझने लगा तेरे गीतों को
सुन-सुनकर ।
बौरा जाता हूँ कभी-कभी यह सोचकर, प्रभु हमने चरणों में तेरे जगह यूँ ही पाली।
बेधड़क हो चला हूँ तेरे खयालों में रह-रहकर, हर डर मन का निकल गया ।
खोए अब हम अपने आप में, ना रह गए, अपने जो प्यार हो गया है तुझसे ।


- डॉ.संतोष सिंह