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Hymn No. 1322 | Date: 12-Oct-1999
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अंत कर दे तू मेरा, मैं हो जाऊँ जो तेरा ।
अंत कर दे तू मेरा, मैं हो जाऊँ जो तेरा ।
तेरे हाथों मरने के वास्ते, करने को कुछ भी हूँ तैयार मैं ।
मुझे ना जनमने का है लोभ, ना ही मरने का कोई डर ।
निडर हो चूका हूँ पाकर प्यार तेरा, बदल गया है जीवन मेरा ।
बची है कोई रजा, तो संग चाहता हूँ हर पल तेरा ।
ढल जाना चाहता हूँ तेरे गीतो में बनकर अमर पंक्तिया ।
मिट जाना चाहता हूँ तेरे कदमो की धूल बनकर ।
फिदा हो जाना चाहता हूँ भौरों की तरह, प्राणों का लोभ त्याग के ।
शरण चाहता हूँ चरणो में, रट लगाते हुए तेरा ।
मान-अपमान की परवाह ना हो, बन जाऊँ तेरा जान मैं ।
एहसास ना हो किसी बात का, प्यार में प्यार बनकर हो जाऊँ तेरा ।
बिन धडकन के रमता रहूँ, तेरे गीतो को गुनगुनाते हुए सदा ।


- डॉ.संतोष सिंह