VIEW HYMN

Hymn No. 1333 | Date: 12-Oct-1999
Text Size
कुछ कहना चाहता हूँ तुझसे, अपने दिल को खोल के सब देना चाहता हूँ ।
कुछ कहना चाहता हूँ तुझसे, अपने दिल को खोल के सब देना चाहता हूँ ।
शब्दो में प्राण भरकर अर्पित कर देना चाहता हूँ चरणों में तेरे ।
सारे गम मिले मेरे दिल को, तुझे फरियाद करके ना याद करना चाहता हूँ ।
तेरे प्यार में मारा- मारा फिरूँ, दर-दर पर मस्ती में झूमते हुए ।
काटो तो खून के बदले मस्ती की तरंग निकले, जो झुमा दे दिलों को सबके ।
फिक्र की जिक्र ना करके, झुमाऊँ तुझे प्यार भरे नगमें सुनाकर ।
बहुत कुछ कमाया, कमा लेने दे तेरे नाम को, जो आडे वक्त निभाए साथ मेरा।
हाथों में ना चाहिए अब कुछ मुझे, जब भी उठे तेरा सजदा करने के वास्ते ।
अस्त होने से पहले, बिना कोई वास्ता दिये, कुर्बान होना चाहता हूँ तुझपर ।
मुरब्बत ना करना, करना तू तेरे मन की, हौसला बढ़ चुका है प्यार करके तुझपर।


- डॉ.संतोष सिंह