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Hymn No. 1334 | Date: 12-Oct-1999
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गा रहा है दिल मेरा, नये-नये गीतों को ।
गा रहा है दिल मेरा, नये-नये गीतों को ।
सुनने-सुनाने के अभिलाषा से दूर, गा उठता है विराने में ।
थिरक उठते है कदम, मस्ती भरे रागों को सुनाकर ।
चैन कैसे आएगा मन को, बेचैन हो उठता हूँ नाचने के वास्ते ।
आजाद हो चुका हूं पाकर साथ शाश्वत आनंद का ।
सुख आए या दुःख, रोक ना पाता हूँ खुद को, मस्ती का जश्न मनाने से ।
नशा करने जाना नही पड़ता कही और, छुपा हुआ है प्यार जो भीतर ।
उमड़ पड़ता है अनजान राहों पर, मंजिल की ओर बढ़ते हुए ।
रिश्तों की तलाश हो गई है खत्म, अपनापन लगता है बेगानों से ।
कोई मायने ना रखता है जीवन और मौत, जो तोड़ दिया तन की सीमा को ।


- डॉ.संतोष सिंह