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Hymn No. 1336 | Date: 13-Oct-1999
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न जाने कितने जन्मों से प्यासा मैं तेरे प्यार का ।
न जाने कितने जन्मों से प्यासा मैं तेरे प्यार का ।
अंजाम हर भुगता तेरे पीछे-पीछे आने के वास्ते ।
भटका इधर-उधर कई बार, पर बढ़ता रहा तेरी ओर ।
गलतियाँ हुई होगी लाखों, पर तेरा नाम बिन भूले याद रहा ।
अभी और कितनी देनी है सजा, मजा है जो मिलूँ तुझसे ।
दिल ने अपना तुझको है मान लिया, तेरे सिवाय नही लगता कही ।
दुआ दे या दर्द, बनाए हुए है तेरे, सह जाएँगे सब कुछ ।
मजा है जो तेरे प्यार में, हर सजा है बौनी उसके सामने ।
पाया है आशिकि का रोग तुझी से, तो दर्द का जिक्र क्यों ।
शुक्रिया अदा करता हूँ, जो मौका दिया तुमने करीब होने का ।


- डॉ.संतोष सिंह