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Hymn No. 1337 | Date: 13-Oct-1999
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बहार आती है जीवन में कई-कई बार, जब छाता है जुनून मस्ती का ।
बहार आती है जीवन में कई-कई बार, जब छाता है जुनून मस्ती का ।
दिल की धड़कन बढ़ जाती है, जब एहसास होता है तेरे करीब होने का ।
साँसो की रफ्तार बढ जाती है, प्रिय तेरे प्यार का अंदाज देखकर ।
जाता हुआ वसंत लौट आता है, जब गूँजती है फिजा में गीत तेरे ।
अनजाने भौरे छेड़ देते है बागे में संगीत, मचलते हुए हीतो में तेरे ।
बाँध देती है समाँ पक्षियों की तान, कोयल की कलरव, विह्वल होकर प्यार में तेरे
बचता नहीं कोई भी संसार में, सरकता हुआ समय रूक जाता है आगे तेरे ।
झनझना उठता है रोम-रोम मेरा, जब मैं महसूस करता हूँ तुझे अपने भीतर ।
अलग-अलग कोई ना है रह पाता, सुध-बुध खोकर हो जाते है एक, प्यार में तेरे ।
जन्नत को छोड़कर दौड़ पडते है धरा की ओर, तेरी रास-लीला देखने के वास्ते ।


- डॉ.संतोष सिंह