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Hymn No. 1338 | Date: 14-Oct-1999
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दीप जलाया है दिल में प्यार का तुमने तो प्यार कर लेने दे मुझे ।
दीप जलाया है दिल में प्यार का तुमने तो प्यार कर लेने दे मुझे ।
रीक्त था जीवन यार के बिना, प्यार से सींचकर नवजीवन दिया तुमने ।
बेअर्थ जीवन का अर्थ जाना तुझसे, आज चरणों में तेरे बिछ जाने दे ।
बेलगाम था मेरा मन, लगाम लगाना सिखाया तुमने, पहुँच जाने दे दौडकर पास तेरे
आसक्त इद्रियां के कारण भटका इधर-उधर, करबद्ध हूँ सम्मुख तेरे ।
इच्छाओं के दलदल में डूबा था कंठ, उबारा देकर सहारा तुमने ।
हालात का मारामारा फिरता था जग में, सुधार आया तेरी रजा से ।
संकोच में डूबा रहकर भीतर ही भीतर जीता था, संकोच को त्यागना सिखाया तुमने
कम है शब्द फिर हस्ति है बड़ी, तेरी कृपा को दर्शाना मेरे वश की बात नहीं ।
पर इतना कहूँगा जरूर, सुख-दुःख में रहकर आनंद में रहना सिखाया तुमने हमें ।


- डॉ.संतोष सिंह