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Hymn No. 1341 | Date: 16-Oct-1999
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अदा करके जुदा हूँ या नहीं हूँ, मैं तो तेरे प्रेम का हूँ मारा ।
अदा करके जुदा हूँ या नहीं हूँ, मैं तो तेरे प्रेम का हूँ मारा ।
तूझपर मर-मिटने की तमन्ना है दिल में, दुनियादारी का खेल खेलने न आया हूँ ।
कब तक चलेगी आँख-मिचौली, हम तो बनना चाहते है हमजोली तेरे ।
जहाँ में सवेरा रोज होता है, ये मौका कब आएगा जीवन में मेरे ।
माना की प्यार नया-नया है, पर दिल की है तमन्ना सदियों पुरानी ।
चाहा था पहले बहुत कुछ तुझसे, बहुत कुछ की छोड़ अब तू नजर आता है सब कुछ ।
हाल कितना भी होगा बुरा, पर दिल को मिलेगा सुकून जो प्यार तेरा मिलेगा ।
किया-धरा जन्म देता है नसीब को, यहीं से शुरुआत है बदनसीबी की ।
हम तो चाहते है खिलना तेरी बगिया में प्रेम पुष्प बनकर, इतराएँगे इशारे पर तेरे।
वह तेरी मर्जी है सिर का ताज बनूँ या गले का हार, आएगा आनंद उतना ही चरणों में तेरे ।


- डॉ.संतोष सिंह