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Hymn No. 1344 | Date: 16-Oct-1999
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खोज रहा हूँ, खोकर तुझमें, मुलाकात करने के वास्ते ।
खोज रहा हूँ, खोकर तुझमें, मुलाकात करने के वास्ते ।
फूल चुन रहा हूँ, तेरे कर कमलों में, सौगात देने के वास्ते ।
अतीत को भूलाकर, बना रहा हूँ पहचान नई, तुझे अपना बनाने के वास्ते ।
आहिस्ते ही आहिस्ते काट रहा हूँ सारे रास्ते तुझसे मिलने के वास्ते ।
हर पल तो नहीं कुछ पल के लिए कर लेता हूँ याद तुझको प्यार करने के वास्ते ।
दिखावा है नहीं प्यार हमारा, पर तेरा ध्यान खींचने का है ये प्रवास ।
जीवन डगर पर अगर-मगर से बचकर, पहूँचना चाहता हूँ पास तेरे ।
मन को ना कोई अब खेल भाता है, वह तो चाहे खेलना प्यार का खेल संग तेरे
हाथों में हाथ आए या न आए कुछ करुँगा फरियाद तुझको पाने के वास्ते ।
मर मरकर जीने से अच्छा, जीना चाहूँ तेरी अमर प्रेम कहानी बनकर ।


- डॉ.संतोष सिंह