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Hymn No. 1347 | Date: 20-Oct-1999
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छेड दे तू हमारे दिल के तारों को, गूँज उठूँ संगीत में ।
छेड दे तू हमारे दिल के तारों को, गूँज उठूँ संगीत में ।
तन-मन थिरक उठे, हो लयबद्ध तेरे प्रेम भरे गीतों में ।
होश ना हो हमको हमारा, गुम हो जाए तेरे प्रेम में ।
भीतर-बाहर हो संगीत का जोर, जीवन-मौत का ना हो कही शोर ।
लयबद्ध होकर करबद्ध हो जाऊँ चरणों में तेरे, बद्ध कर ले साथ तू अपने ।
एहसास ना चाहिए हमको किसीका, दीवानगी में तेरे खोया रहूं ।
ख्वाब हो या भ्रम, मत तोड़ना तू इसे, जीने दे तू मुझे इसमें ।
साए की तरह पीछे रहूँगा तेरे, रोशनी हो या अँधेरा, जाऊँगा समा तुझमें ।
जनमा हूँ प्रेम के वास्ते तेरे, थिरकना चाहूँगा इशारे पर तेरे ।
तेरे इकरार-इनकार का ना करुँगा इंतजार, दिल की धड़कन-धड़के तेरे थाप से ।


- डॉ.संतोष सिंह