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Hymn No. 1348 | Date: 20-Oct-1999
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कर्ममय है प्रभु हम तो, तू रहना नर्ममय ।
कर्ममय है प्रभु हम तो, तू रहना नर्ममय ।
धर्ममय है प्रभु हम तो, तू रहना प्रेममय ।
अज्ञानमय है प्रभु हम तो, तू रहना ज्ञानमय ।
क्षणभंगूर है प्रभु हम तो, तू रहना क्षणभंगुर ।
भेदमय है प्रभु हम तो, तू रहना अभेदमय ।
कालवश है प्रभु हम तो तू है अकाल पुरुष ।
जातमय है हम प्रभु, हर जात से ऊपर तू अजातमय ।
चिरकाल से प्रभु तलाश है तेरी, तू रहना सदा पास-पास ।
साँस बनने की चाहत नहीं, जो तू बना ले अपना दास ।
ज्ञात होकर भी प्रभु हम तो, तू है सदा से अज्ञात होकर ।


- डॉ.संतोष सिंह