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Hymn No. 1350 | Date: 22-Oct-1999
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देखा तुझको ख्याल उठे मन में कई-कई एक ही संग ।
देखा तुझको ख्याल उठे मन में कई-कई एक ही संग ।
चाँदनी की शीतलता पड़ गई फीकी, जब डूबा दिल तेरे प्रेम में ।
वक्त भी थमने लगा, जब-जब खोया प्रेम में तेरे ।
पलके भी झपकना भूल गया, चला जब सिलसिला तेरी यादों का ।
फिदा हो गए है हम, जीते जी तेरी अदाएँ देख-देखकर ।
सताने लगा जालीम, जब तू ख्वाबों में आकर जो नींदे चुराने लगा ।
बरस पडी आँखें सावन-भादों की तरह, खाकसार को मिली जो खुशियाँ इतनी ।
माँगने से पहले अपनाया तुमने चरणों में देकर शरण ।
रोम-रोम झूमे प्यार भरे तरंगो में, जो आए तेरी और से ।
ना चाहिए कुछ और तुझसे, जो चाहा है उसे पूरा कर दिखाऊँगा ।


- डॉ.संतोष सिंह