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My Divine Blessing
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Hymn No. 1351 | Date: 22-Oct-1999
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हलचल मच रही है मेरे भीतर, तेरे प्रेम से उपजा आनंद ।
हलचल मच रही है मेरे भीतर, तेरे प्रेम से उपजा आनंद ।
ख्वाब जो देखा था तेरी कृपा से, बदल रहा है वास्तव में ।
जीवन का अंधेरा, घटने लगा, आनंद भरे तरंगों से घिरते ही ।
सरोकार ना हा किसी बात से, मस्ती का आलम है सुख-दुःख में ।
कहा-सुनी जैसा कुछ ना रह गया, सुनकर-अनसुना-सा लगता है सब कुछ ।
अब भी ना है हाथो में कुछ मेरे, घिरा रहता है जो खुशियों से ।
दर-ब-दर चल रहा है जश्न, नशे में खो बैठा हूँ होश अपना ।
बिना मिटे, मिट चुके है तेरे प्यार में, रोम-रोम मेरा ना रहा अब ।
होश में ना आना है अब मुझे, चाहे खत्म हो जाए जीवन प्यार के खेल में ।
पते की बात बताता हूँ, जो ना का होश में, वह कर डाला नशे में, तेरे लबों को चूमकर ।
- डॉ.संतोष सिंह
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देखा तुझको ख्याल उठे मन में कई-कई एक ही संग ।
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कोई क्या दे देगा, कोई क्या ले लेगा, प्रेमी हूँ प्रेम के सिवाय कुछ ना है पास मेरे ।
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