Hymn No. 1352 | Date: 22-Oct-1999
कोई क्या दे देगा, कोई क्या ले लेगा, प्रेमी हूँ प्रेम के सिवाय कुछ ना है पास मेरे ।
कोई क्या दे देगा, कोई क्या ले लेगा, प्रेमी हूँ प्रेम के सिवाय कुछ ना है पास मेरे ।
जब चला था साथ था, इसका, लूट गया बहुत बार, लूट न पाया इसको कोई इक बार ।
धड़कता-मचलता रहा सीने में फडफडाता, तेरी खोज में भटकता रहा, न जाने कहाँ-कहाँ।
सब कुछ सहा जुबाँ से कभी कुछ, ना कहाँ, गलतियो से सबक सीखना था सजा पाकर ।
रोया था भीतर ही भीतर, छलकने ना दिया आँखों से आँसुओं को, चाहे डूब जाना पडा ।
कोई कितना भी कह ले, कहेंगे ना हम कुछ, तुझे चुपचाप रहकर प्यार करते रहेंगे
जिद ना कोई का है, नौबत पड़ने पर, प्यार में सिर गँवाने से भी ना चुकेंगे
बातें बनाता हूँ इसमें ना है कोई दो राय, तुझे खुश करने के लिए करुँगा मैं कुछ भी ।
लगाता है कोई इल्जाम तो करुँगा कबूल चुपचाप उसे, तेरे दिल को खूश रखने के वास्ते ।
बंद हो जाए मेरे वास्ते दुनिया के सारे रास्ते, फिर भी ना डिगेगा कदम राहे प्यार से ।
- डॉ.संतोष सिंह
|