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Hymn No. 1355 | Date: 27-Oct-1999
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प्रभु प्रकटाया अपने दिल से शब्दों को तुमने ।
प्रभु प्रकटाया अपने दिल से शब्दों को तुमने ।
सिखाया शब्दों के सहारे, हमको दिल की बात कहना ।
प्रगटाया शब्दों के द्वारा तुझको, तेरे भक्तो ने बार-बार ।
दिल के तार मचलते है जब, लेता है आयाम शब्दों से गीत नया ।
सबसे सहज सरल माध्यम है शब्द, पास पहुँचने के तेरे ।
शब्दों ने बताया तेरा पता, कुछ ना छिपाया किसीसे, दिया तेरा नाम शब्दों में ।
शब्द सदा से है न होने से पहले, होने के बाद भी है ये ।
शब्दों की महीमा है सबसे न्यारी, सदा से है तुझको प्यारी ।
मन को नाथना होता है शब्दो के द्वारा, प्रभु के बाद शब्द ही है सहारा ।
खेल है संसार में शब्द का, जिसने खेला शब्द से, पाया तुझको पास अपने ।


- डॉ.संतोष सिंह